रक्षाबंधन पर सर्वश्रेष्ठ कविता | Poem On Raksha Bandhan In Hindi

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Poem On Raksha Bandhan In Hindi :- भाई-बहन का रिश्ता दुनिया के सभी रिश्तों में सबसे ऊपर है. हो भी न क्यों, भाई-बहन दुनिया के सच्चे मित्र और एक-दूसरे के मार्गदर्शक होते है. जब बहन शादी करके ससुराल चली जाती है और भाई नौकरी के लिए घर छोड़कर किसी दूसरे शहर चला जाता है तब महसूस होता है कि भाई-बहन का ये सर्वोत्त रिश्ता कितना अनमोल है. सरहद पर खड़ा एक सैनिक भाई अपनी बहन को कितना याद करता है और बहनों की ऐसे वक्त क्या दशा होती है इसके लिए शब्द नहीं है. रंग-बिरंगे धागे से बंधा ये पवित्र बंधन सदियों पहले से हमारी संस्कृति से बहुत ही गहराई के साथ जुड़ा हैं.

यह पर्व उस अनमोल प्रेम का, भावनाओं का बंधन है जो भाई को सिर्फ अपनी बहन की नहीं बल्कि दनिया की हर लड़की की रक्षा करने हेतु वचनबद्ध करता है. भाई-बहन के आपसी अपनत्व, स्नेह और कर्तव्य बंधन से जुड़ा त्योहार भाई-बहन के रिश्ते में नवीन ऊर्जा और मजबूती का प्रवाह करता है. बहनें इस दिन बहुत ही उत्साह के साथ अपने भाई की कलाई में राखी बांधने के लिए आतुर रहती हैं. जहां यह त्योहार बहन के लिए भाई के प्रति स्नेह को दर्शाता है तो वहीं यह भाई को उसके कर्तव्यों का बोध कराता है. रक्षाबंधन भाई बहन के रिश्ते का त्योहार है,

रक्षा का मतलब सुरक्षा और बंधन का मतलब बाध्य है. रक्षाबंधन के दिन बहने भगवान से अपने भाईयों की तरक्की के लिए भगवान से प्रार्थना करती है. राखी सामान्यतः बहनें भाई को ही बाँधती हैं परन्तु ब्राह्मणों, गुरुओं और परिवार में छोटी लडकियों द्वारा सम्मानित सम्बंधियों (जैसे पुत्री द्वारा पिता को) भी बाँधी जाती है. वास्तव में ये त्योहार से रक्षा के साथ जुड़ा हुआ है, जो किसी की भी रक्षा करने को प्रतिबद्ध करता है. अगर इस पवित्र दिन अपनी बहन के साथ दनिया की हर लड़की की रक्षा का वचन लिया जाए तो सही मायनों में इस त्योहार का उद्देश्य पूर्ण हो सकेगा. इस पावन त्योहार का अपना एक अलग स्वर्णिम इतिहास है, लेकिनि बदलते समय के साथ बाकी रिश्तों की तरह इसमें भी बहुत से बदलाव आए हैं. जैसे-जैसे आधुनिकता हमारे मूल्यों और रिश्तों भाई-बहन का प्यार धरती पर शाश्वत रह पायेगा.

यह पर्व भारतीय समाज में इतनी व्यापकता और गहराई से समाया हुआ है कि इसका सामाजिक महत्व तो है ही, धरम्म प्राण, इतिहास, साहित्य और फ़िल्में भी इससे अछूते नहीं हैं. रक्षाबन्धन पर्व सामाजिक और पारिवारिक एकबद्धता या एकसूत्रता का सांस्कृतिक उपाय रहा है. लेकिन अब प्रे रस में डूबे गंग-बिरंगे धारगों की जगह चांदी और सोने की राखियों ने ली तो सामाजिक व्यव्हार में कर्तव्यों को समझने के बजाय रिवाज को पूरा करने कि नौबत आई. प्रेम और सद्भावना की जगह दिखावे ने ले ली. तभी तो रक्षा-बंधन के दिन सुबह उठते ही हर किसी के स्टेटस पर बस रक्षाबंधन की तस्वीरें और वीडियो की भरमार होती है, अब बहनों की जगह ई-कॉमर्स साइट ऑनलाइन आर्डर लेकर राखी दिये गये पते पर पहुँचाती है.

अगर हम सोशल मीडिया पर दिखावे की जगह असल जिंदगी में इन रिश्तों को प्रेमरुपी जल से सींचा जाए तो हमेशा परिवार में मजबूती बनी रहेगी. राखी के त्योहार का मतलब केवल बहन की दूसरों से रक्षा करना ही नहीं होता है बल्कि उसके अधिकारो और सपनों की रक्षा करना भी भाई का कर्तव्य होता है, लेकिन क्या सही मायनों में बहन की रक्षा हो पाती है? आज के समय में राखी के दायित्वों की रक्षा करना बेहद आवश्यक हो गया है.

राखी के दिन केवल अपनी बहन की रक्षा का संकल्प मात्र नहीं लेना चाहिए नहीं बल्कि संपूर्ण नारी जगत के मान-सम्मान और अधिकारों की रक्षा का संकल्प लेना चाहिए ताकि सही मायनों में राखी के दायित्वों का निर्वहन किया जा सके. रक्षाबंधन पर्व पर हमें देश व धर्म की रक्षा का संकल्प भी लेना चाहिए.

 

Poem On Raksha Bandhan In Hindi

 

स्नेह पर्व राखी

Poem On Raksha Bandhan In Hindi

 

राखी, पर्व स्नेह का लायी,

मन में मृद्ता भरे मिठाई.

बहिन ने प्रेम से बाँधी राखी,

भाई की सज गई कलाई.

 

प्रिय भाई संपन्न सुखी हो,

दिया बहिन ने अमित बधाई.

बहिन की रक्षा में हो तत्पर,

भाई ने शुभ रीति निभायी.

 

स्वाभिमान से बहिन कह रही,

देसी राखी स्वयं बनायी.

बहिनों को ही राखी बाँें,

जिनके नहीं सगा हो भाई.

 

पेड़ों को भी बाँधें राखी,

चहँदिश हरीतिमा हो छायी.

राष्ट्रधर्म भी करें प्रदर्शित,

धागा एक महा सुखदायी.

 

राखी पर्व है याद दिलाता,

संबंधों में हो गहराई.

-गौरीशंकर वैश्य विनम्र

 

रक्षासूत्र

Poem On Raksha Bandhan In Hindi

 

सुन मेरी प्यारी सहोदरा,

राखी बांधने आना तुम.

देखता रहुंगा राह तुम्हारी,

मुझे भूल ना जाना तुम.

 

खरीदना बाजार से राखी,

लाना लड्डूर मीठी मिठाई.

लगाना भाल विजय तिलक,

पुकार रही है खाली कलाई.

 

भेट करुंगा एक नया उपहार,

खुशी से झम कर नाचोगी.

सुख-समृद्धि कि कामना करके,

रक्षासूत्र जीवन का बांधोगी,

 

जब संकट में घिर जाओगी,

मेरा नाम लेकर देना आवाज,

कहना अभी मेरा भाई जिंदा है.

 

मेरे लिए लड़ेगा वो है जांबाज.

जब कोई मानव-अमानव बन,

दुःख और दर्द तुझे पहुंचाएगा.

 

उस दिन बनकर योद्धा रक्षक,

तेरा ये भाई दौड़ा चला आएगा.

-अशोक कुमार यादव

 

रक्षाबंधन

Poem On Raksha Bandhan In Hindi

 

प्रेम बसा इसमें रेशम की बस डोर नहीं,

ये स्नेह के धागे जिसका कोई छोर नहीं.

दो दिलों के पवित्र बंधन का यह रिश्ता,

अम्बर से उतरे जनम-जनम से ये रिश्ता.

 

इस जग में इससे बड़ा कोई प्रेम नहीं,

ये स्नेह के धागे जिसका कोई छोर नहीं.

संग पले और बढ़े स्नेह बराबर पाये जो,

लड़ते व झगड़ते प्रेम की धार बहाये जो.

 

सम है दोनों प्रेम में, कोई कमजोर नहीं,

ये स्नेह के धागे जिसका कोई छोर नहीं.

मिले सावन पुर्णिमा में सजल होते दो नैन

बांध रक्षा सुत्र इस दिन पाते हैं दोनों चैन,

 

रक्षाबंधन से बड़ा बंधन कोई और नहीं,

ये स्नेह के धागे जिसका कोई छोर नहीं.

भाई बहन के लाडप्यार की राखी है पहचान,

एक दुजे पर जान लुटा दे बस इतना अरमान.

 

ये अट्ट बंधन है जिसमें गांठ का ठौर नहीं,

ये स्नेह के धागे जिसका कोई छोर नहीं.

एक पिता के साथे दो संग-संग करे अठखेली,

बात बात में रूठे और माने हैं अजब पहेली.

 

रक्षाबंधन से बाड़ा जग मे कोई त्योहार नहीं,

ये स्नेह के धागे जिसका कोई छोर नहीं.

-प्रमेशदीप मानिकपुरी

 

राखी का त्यौहार

Poem On Raksha Bandhan In Hindi

 

भाई बहन का प्यारा रिश्ता,

आया राखी का त्यौहार,

घर घर में खुशियाँ लाया,

देखो भाई बहन का प्यार,

 

रोली चंदन से थाल सजा,

आरती कर तिलक लगाया.

लड्डू पेड़ा बरफी देखो,

थाली भरकर बहना लाई.

 

रेशम की डोरी बाँध कर,

दुआ माँगती है बारम्बार.

प्रीत निभाती प्यारी बहना,

भाई देता है प्यारा उपहार.

 

सदियों से चला आ रहा,

रक्षाबंधन का यह पर्व.

भाई बहन का प्यार देख,

होता मात पिता को गर्व,

-सुशीला साह

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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