11+ गुरु पूर्णिमा पर कविता | Guru Purnima Poem In Hindi

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Guru Purnima Poem In Hindi:- जीवन में हम जिनसे भी सीखते हैं, वह हमारे गुरु हैं; हम हमें निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है माता पिता हमारे प्रथम गुरु हैं, जिनसे हमारा अस्तित्व है, परिवार जहां से हमें संस्कार मिलते है, पहचान मिलती हैं शिक्षक हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं जीवन में ज्ञान का प्रकाश फैला कर अंधकार के तिमिर को दूर करते हैं हम गुरुवर के द्वारा बताए गए मार्ग का अनुसरण करते हैं,तो सदैव हमें सफलता की उच्च शिखर प्राप्त होती है। गुरु ज्ञान के सागर होते हैं, जिनकी कृपा अमृत की धार जैसी होती हैं जो हमें पावन ज्ञान से भवसागर पार करा जाते हैं ।

जीवन के कठिन मार्ग सुगमता से चलना गुरुवर सिखलाते हैं। जब जब हम राह भटकने लगते हैं, तब तब हमें गुरुवर का सानिध्य मिलता है। आदर्शों का पाठ पढ़ाकर गुरुवर हमारे अंतर्मन को प्रकाशमय करके आदर्शवादी बनाते हैं। हमें मानवता और कर्तव्यनिष्ठा का पाठ पढ़ाते हैं जिंदगी के इस सफर में सीखने के दौर में गुरु के मार्गदर्शन से ही हमें कामयाबी मिलती है। गुरु शिक्षा की बुनियाद रखकर प्रेरक विचार से हमारे भविष्य की नींव रखते हैं। हमें पुस्तक से ही नहीं अपितु अपने आसपास निहित वातावरण, परिस्थिति से भी सीख मिलती है वो भी हमारे गुरु हैं ।

अपनी अमृतवाणी से हमारे अंतर्मन में ज्ञान ज्योतिपुंज जलाकर हमें ज्ञानवान बनाकर मंजिल तक पहुंचाती है। भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जी ने भी अपनी शिक्षा विश्वामित्र और वशिष्ठ जी से ग्रहण किया था, भगवान श्री कृष्ण जी ने भी अपनी शिक्षा गुरु संदीपनी जी से प्राप्त किया था, महाभारत काल में अर्जुन को गुरुद्रोणाचार्य ने एकाग्रता का पाठ पढाया था, श्री कृष्ण जी ने कुरक्षेत्र के मैदान में गीता का ज्ञान दिया था हमारे वेद पुराणों में भी गुरु के ज्ञान का वर्णन है गोस्वामी तुलसीदास जी, कबीर दास जी,गुरु नानक जी सभी ने गुरुओं की महिमा को बतलाया है।

 

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गुरुवर का चरण हमारे माथे का चंदन है,

गुरु हमारा देव है गुरु हमारा पूजन है।

रामकृष्ण को भी शिक्षा गुरुवर ने दिया,

गुरुवर जैसा कोई नहीं गुरु को मेरा वंदन है।।

 

गुरु हमारे वर्तमान को निखार कर हमारे भविष्य को सँवारता है,जीवन के गुढ़ रहस्यों को बतलाता है। हमें अच्छे बुरे का ज्ञान कराकर सन्मार्ग में चलना सिखाता है इस धरा पर शिक्षक ज्ञान का अलख जगा कर उज्जवल भविष्य का निर्माण करता है। गुरु कोई भी रूप में हो सकते हैं हमारे माता-पिता हमारे मित्र सब हमारे गुरु होते हैं जो हमें संस्कार और संस्कृति सिखलाते हैं।

 

गुरू ही जीवन का अधार

Guru Purnima Poem In Hindi

 

गुरू ही जीवन का आधार

शिक्षक दिवस मनायें भ्राता,

राधाकृष्णन् से है नाता।

 

शिक्षा हो उद्देश्य तुम्हारा,

शिक्षा से होता उजियारा।

गुरु समान न दूजा है,

प्रथम गुरु माता है सबकी,

शिक्षा जग की पूजा है।।

 

शिक्षित होकर बच्चो तुम सब,

करना जग से प्यार।।

द्वितीय गुरु हैं पिता तुम्हारे।

 

आदि से लेकर अन्त समय तक,

कुम्भकार सा जीवन वारे।

वही गुरु है श्रेष्ठ तुम्हारा,

तम हरता, देता उजियारा।।

 

एकलव्य, अरुणि जैसे शिष्य होते हैं बलिहार।।

अज्ञानी को ज्ञानवान् कर,

निर्दय-हृदय, दयावान कर।

 

मूरख को विद्वान बनाकर,

मानव को गुणवान बनाकर।

सभ्य श्रेष्ठ इसान बनाकर,

मनुजों को भगवान बनाकर।।

 

गुरुवर जब कृपा करते हैं, होते भव से पार ।

शिक्षा को यदि अपनाओगे,

कभी नहीं धोखा खाओगे।

 

यदि परिश्रम करते जाओगे,

प्रगति पर बढ़ते जाओगे।

अन्त समय तक जीवन का सुख,

शिक्षा से ही तुम पाओगे।।

 

पढ़ लिखकर के तुम मद में न,

होना कभी उलार।।

निज गुरुओं को प्रणाम करो,

वृद्धों का भी सम्मान करो।

 

खाली मत बैठो, काम करो,

जग में अपना कुछ नाम करो।

दुखियों की पीड़ा हरा करो,

देश-धर्म पर मरा करो।।

 

का आशीर्वाद, जीवन भर मिले अपार।

शिक्षा अग-जग का नारा है,

शिक्षा ही लक्ष्य तुम्हारा है।

 

भारत का अब हर इसान,

शिक्षित होकर बने महान।

शिक्षा से पावें उपहार,

कम बच्चे हों वृक्ष हजार ।।

 

जन-जन में यह भाव भरे,

तब सुखी रहे संसार।।

-कृष्ण कुमार वर्मा

 

ऐ गुरुतर तेरे शिष्य हम

Guru Purnima Poem In Hindi

 

ऐ गुरुवर तेरे शिष्य हम,

गुरुवर को हमारा नमन

गुरुवर की जगह, है प्रभु से ऊपर,

ऐसा प्रभु ने स्वयं कहा

 

जब गुरुओं का हो सामना,

तब पूरी हो हर कामना

गुरुओं ने दिया,ज्ञान की ज्योति को,

जिससे जीवन ये रोशन हुआ

 

बढ़ चले ये हमारे कदम,

है ये गुरुओं की शिक्षा का असर

गुरुओं की जगह,है प्रभु से ऊपर,

ऐसा प्रभु ने स्वयं कहा

 

ये गुरुवर तेरे शिष्य हम

जिसने हमको दिया है जनम,

पहली गुरु मां को भी नमन

वो सभी गुरु है, जिसने दिया है,

 

जीवन में आगे बढ़ने का हुनर

बन गए हैं हम अच्छे इसान,

है ये गुरुओं का हमारे वरदान

गुरुवर की जगह, है प्रभु से ऊपर,

 

ऐसा प्रभु ने स्वयं कहा

ये गुरुवर तेरे शिष्य हम

-अंजली मौर्या

 

गुरु

Guru Purnima Poem In Hindi

 

शिक्षा का सागर गुरु ही है

ज्ञान बराबर बाँंटनेवाले गुरू ही है।

माता-पिता का नाम दूजा

गुरू को ही कहलाते है

 

गुरू ही है सबका सहारा

गुरु ही करते सपना पुरा

यदी जिंदगी में गुरू न होते तो

सबका जीवन ही रह जाता अधूरा

 

गुरू के पास न होती जात- पात

वे कभी भी नही पक्षपात करते

अमिर हो या कोई गरिब

सबको ही एकसमान देखते

 

गुरू-शिष्य का नाता अनन्यसाधारण है

उसका कोई मोल नही है

गुरू की महती जगत में बडी महान है।

उसिको किसी के साथ तोल नहीं जाता है।

 

भारत के इतिहास में

गुरू का बडा स्थान है

इसलिए तो सारे संसार में

भारतीय संस्कृती महान है

-नंदकुमार मरवड़े

 

शिक्षक है गौरवशाली

Guru Purnima Poem In Hindi

 

गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु ही महेश है,

गुरु है परम ब्रह्म, गुरु को प्रणाम है।

सतयुग त्रेतायुग द्वापर व कलयुग,

चाहे कोई युग हो, गुरु ही महान हैं।

 

आजादी के गुरु गांधी, आजाद, भगत सिंह,

नेताजी सुभाष बोस, रानी लक्ष्मीबाई है।

तुलसी,सूर, जायसी, कबीर और प्रेमचंद,

इनकी कलम ने इंसानियत सिखाई है।

 

सुश्स्त व चरक मुनि गुरु आयुर्वेद के हैं,

चाणक्य व बीरबल जी महानीतिवान हैं।

संगीत आराधक तानसेन, बैजू बावरा,

भीमसेन जोशी, लता इंडिया की शान हैं।

 

गुरुदेव रवीन्द्र ने हमें राष्ट्गान दिया,

चंद्रयात्री राकेश शर्मा इंडिया का नाम किया।

ए,.पी.जे. अब्दुल कलाम जो मिसाइल मैन है,

उस उस्ताद को सारे जहां ने सलाम किया।

डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन को प्रणाम,

राष्ट्पति ही नहीं वो श्रेष्ठ शिक्षक, महापुरुष हैं।

शिक्षकों के नाम किया अपना जन्मदिन,

सत्य कहा गुरुजी तो देव के ही रूप हैं।

सच्चा गुरु ही बनाए डाकू को भी साधुजन,

लिखे रत्राकर बाल्मीकि बन रामायण।

अर्जुन को मिला जब कृष्ण का गीता ज्ञान,

मोह-माया त्याग जीता, महाभारत का समर।

 

ज्ञान दाता ने बताया ग्रथ है परम पवित्र, करो

आत्मसात नीति, ज्ञान व सदाचरित्र।

शिक्षक निर्माता है, जगत का विधाता है,

शुभदृष्टि करे उनकी जग को परम पवित्र।

गुरु की कृपा से अनहोनी बन जाए होनी,

मिले मोक्ष, पाप मुक्त हो जाए मनुष्य योनि।

गुरु ज्ञान जैसे हनी, श्रद्धा में न रखो कमी,

पाओगे दुनिया में, सुख-संपदा व मनी।

 

शिक्षक है गौरवशाली, वो ईंद और दिवाली,

हृदय की खुशहाली, रा्ट बाग का वो माली है।

वो शिक्षा का स्तंभ, जीवन पुष्प मकरंद, व

ही गद्य और छंद, तमहर्ता अंशुमाली है।

-चितरंजन कुमार चौहान

 

गुरु है समझ

Guru Purnima Poem In Hindi

 

गुरु है समझ, दुनिया है सर्व शक्ती

भविष्य निर्माता, निर्मल स्वभाव, तेज उक्ति

छात्र- ज्ञान को महत्व देते रहे मूर्तिकार,

कबीर व तुलसी सराहा गुरु का

राष्टर हितार्थ तैयार किया शिष्य वृंद,

समय पालन करते करते छात्रों का बिंद

ईमानदार,सदाचार, चरित्र निर्माण व कर्तव्यनिष्ठ,

उंगली पकड़ चले माता – पिता बनकर वरिष्ट

मिटाकर तमस छाई ज्योत जगाते,

संस्कृति, सभ्यता व सत्य मार्ग दिखाते

योग्य आचरण, आंतंरिक विकास पर ध्यान,

नैतिक मूल्य नागरिक निर्माण दायित्व ग्यान

गुरु बनकर रहता है सदा साया छात्रों की,

भाई व बहनों स्रेह से बंधी माया पात्रों की

हर जन्म में ऐसे कोई नहीं मिलता हैं,

हर मार्ग में नए उल्लास व आशा भरतें है

वंदन अभिनंदन गुरु मन्त्र जपते जपते,

सदा स्मरण करते हैं जिन्हें प्रभु वरदान

-डॉ मलकप्पा अलियास महेश

 

गुरु का महत्व

Guru Purnima Poem In Hindi

 

गुरु ने होते इस जीवन में तो,

हमको राह दिखाता कौन।

काले काले अक्षर किताब के,

पढ़ना हमें सिखाता कौन।

 

काँटों भरी कठिन डगर में ,

चलना हमें सिखाता कौन।

आग में तपकर कुंदन सा,

निखरना हमें सिखाता कौन।

 

जब डुब जाता मन निराशा में,

आस दीप जलाता कौन।

देकर भीतर से मजबूत सहारा,

आगे हमें बढ़ाता कौन।

नियम अनुशासन के महत्व से,

परिचित हमें कराता कौन।

परोपकार ,सदाचार की बातें,

प्यार से हमें समझाता कौन ।

 

शब्द भी कम पड़ जाते मेरे ,

गुरू से बढ़कर होता कौन।

अपने सुख का त्याग करके,

सिर पर हाथ रखता कौन।

 

सही गलत उचित अनुचित का,

भेद हमें समझाता कौन।

हम बच्चे गीली मिट्टी हैं,

कुम्हार सा सुंदर रूप देता कौन।

गुरु ब्रम्हा गुरु विष्णु, सृ

ष्टि सूजन का महत्व बताता कौन।

गुरु शिल्पकार, गुरु चित्रकार,

हममें नव रंग भरता कौन।

 

मात पिता की सेवा करना,

रिश्तों का मोल बताता कौन।

गुरु के सीख बिना,

जीवन में नाम कमाना सिखाता कौन।

-श्रीमती अनिता चन्द्राकर

 

चेहरे को देते खुशहाली

Guru Purnima Poem In Hindi

 

वो मेरे गुरुवर है मैं कर्ज उनका कैसे उतारूंगी!

मेरे जीवन को सवांर दिये ये मर कर भी भूल ना पाऊँगी!!

माँ ने मुझको जन्म दिया इस दुनियाँ में लाई थी!

जीवन के हर कदम पे मुश्किल से सामना करना सिखलाई थी!!

दुजे गुरु मेरे पापा थे हर संकट बाधा से मुझे वो चलना सिखलाये थे!

सूरज की तरह जल कर मुझको जीवन मे ठंढक में रहना बतलाये थे!!

बाहर से नारियल जैसे कड़े अंदर नर्म रुई की फाहें !

मेरे पापा भैया ने ज्ञान देकर मुझे हर पल रास्ता दिखलाया था!!

तीसरे गुरु ने ज्ञान का भंडार खोला हर पग रौशनी से मुझे सजाये थे!

अपनी शिक्षा से मुझको मेरे जीवन को रौशन कर ज्योति जलाये थे।!

मेरे ये सभी गुरुवर मुझे हर बगिया में फूलों से महाकाये थे!

अपने दिल की हर बात करूँ मैं उन्होंने मुझको हर वेद पढ़ाये थे!!

कभी मित्र और गुरु बनकर सृष्टि में चलना मुझे आपसब बतलाये थे!

विन पैसे का ज्ञान देकर सृष्टि में रहना और सृष्टि की उन्नति सिखलाते थे!!

उच्चे शिखर पर पहुंचाकर खुद गुरु ही बने रह जाते है!

शिक्षा का ज्ञानदीप जलाकर शिक्षित मुझे कर जाते है!!

हर कठिनाई में राह दिखाते अनहोनी को होनी कर जाते थे!

ज्ञान प्रकाश का पथ दिखला कर जीवन मे रंग भर जाते थे!!

गुरु से बढ़कर कोई भी दुनियाँ में महान नहीं होता!

गुरु को क्या दूँ सम्मान में शिष्य के पास कोई गुरुदक्षिण नही होता !!

गुरु जैसा गौरवशाली हर खुशी हर चेहरे को देते हर पल खुशहाली!!

इसलिये दुनियां गुरु को करती नमन हर पल हर हाल में गुरु होते रब्र।

-कुमारी मंजू मानस

 

सर्वोतम गुरु समय

Guru Purnima Poem In Hindi

 

निरिक्षण सभी का करते हो रहते हो मौन,

किस दिशा तुम पग भर जाओ,

इसको भला पहचान पाया कब, कौन ?

 

किसी के लिए बन जाते हो सबक,

तो किसी के लिए मन का विश्वास हो

समय, तुम भी गुरु सबसे खास हो।

 

गिरतों को संभालने का हुनर भी तुम में है,

तारों पर चलने वालों को भी।

धरातल पर लाना तुम जानते हो,

हर क्षण सिखाते हो कुछ नया,

 

बुझती हुई उम्मीदों के तुम ही तो प्रभास हो,

समय, तुम भी गुरु सबसे खास हो

कभी बन जाते हो सख्त परिक्षक

कभी खुद ही सलाहकार बन जाते हो,

 

हर मौका देते हो आगे बढ़ने का,

 कभी गामभीर्य की वाणी,

तो कभी उदासी में बन जाते परिहास हो,

समय, तुम ही गुरु सर्वोत्तम, सर्वश्रेष्ठ सवसे खास हो।

-डॉ. अभिलाषा गौतम

 

गुरु ऋषि

Guru Purnima Poem In Hindi

 

जन्म मुझे मेरी माताजी देतीं,

पालनहार पिताजी बनते हैं

मगर मानवता की सीख सिखा कर,

शिक्षक जीवन में रंग भरते हैं..!.

धर्म- अधर्म का भेद बताकर,

सही कर्म करना सिखलाते है

 

गुरू रषि सा मेरा शिक्षक,

मुझे ज्ञान की पाठ पढ़ाते हैं..!!

स्वयं दीपक सा जलते हैं वो,

जीवन मेरा प्रकाशित करते हैं.

ना तो दौलत की चाहत है उनको,

ना हीं पैसों पर वो मरते हैं.

 

खुद अंधियारा में रहकर वो,

जीवन मेरा उजियारा करतेहैं ।

गुरू त्रृषि सा मेरा शिक्षक,

मुझे ज्ञान की पाठ पढ़ाते हैं..!!

जितनी खूबी है उनके अंदर,

सारा मुझपर आजमाते हैं।

एकबार में गर मैं ना समझं,

तो सौ बार मुझे समझाते हैं…!

 

ईश्वर से भी बढ़कर शिक्षक होते हैं,

ऐसा कबीरा बतलाते हैं

गुरु ऋष सा मेरा शिक्षक,

मुझे ज्ञान की पाठ पढ़ाे हैं..!!

जीवन संघर्षों से भरा है,

कहकर मुझे संघर्ष करना सिखलाते हैं

कहीं लड़खड़ा जाए पग मेरा तो,

हाथ पकड़ वो उठातेहै.

 

अंधेरा में वो जुगनू बनकर,

मेरा जीवन जगमग कर जाते हैं।

गुरु अषि सा मेरा शिक्षक,

मुझे ज्ञान की पाठ पढ़ाते हैं..!

सत्य मार्ग पर चलना सिखलाते,

असत्य को गलत बताते हैं।

मुझसे चाहे जो भी भूल हो जाए,

हँसकर गले लगाते हैं..!

नफरत को प्यार से जीत लेना,

यही जीवन का मूलमंत्र बतलाते हैं।

गुरु अष सा मेरा शिक्षक,

मुझे ज्ञान की पाठ पढ़ाते हैं….!!

-ऋषि रंजन

 

गुरु शिष्य की परम्परा

Guru Purnima Poem In Hindi

 

गुरु सो ज्ञान जू लिजिए,सीस दीजिए दान

बहुतक भौदु बहि ग ए, राखी जीव अभिमान।।

गुरु की आज्ञा आवै, गुरु की आज्ञा जाय ।

किहै कबीर सो सन्त है, आवागमन नशाय।।

 

गुरु को कीजे दण्ड वत कोटि कोटि प्रणाम

कीट न जाने भूग को, गुरु करते आप समान ।।

गुरु पारस को अंतरों, जानते हैं सब सन्त ।

वह लोहा कंचन करें, ये करि देर महन्त।।

 

गुरु कुम्हार कुंभ है. गढ़ि गढ़ी काढ़ खोट।

अन्तर हाथ संसार दैबाहर बाहै चोट।।

कुमति खींच चेला भरा, गुरुश्रान जल होय।

जन्म जन्म का मोरचाए कमल में डारे धोया।।

 

लच्छ कोष जो गुरु सबै,दीजै सुरति पठाय।

कैसे कबीर ता दास को तीन लोक भय नाभि ।।

गयान प्रकासया गुरु मिलता, से जिनि बीसरि जाइ।

जब गोविंद कृपा करी, तब गुरु मिलिया आई।।

 

सब धरती कागद करु, लेखनी सब बन जाय।

सात समुद्र की मसि करने, गुरु गुण लिखा न जाय।।

गुरु बिन ज्ञान न ऊपजै, गुरु बिन मिलै न मोक्ष।

गुरु विन रखैल न सत्य को, गुरु बिन मिटै न दोष।

 

शब्द तुरी असवार है, छिन आवै जाय ।।

गुरु को सिर राखिए, चलिए आज्ञा माहि।

गुरु गोविंद दोड खड़े, का्के लागूं पाय।

बारी-बारी गुरु आपकी,जिन गोविंद दियों बताए।।

-डॉ हिमांशु कुमार सिंह

 

गुरुतर ऐसा ज्ञान दो

Guru Purnima Poem In Hindi

 

गुरुवर बच्चों को ऐसा ज्ञान दो,

कि आ जाये वो सबके काम।

मानवता पर मर मिटे सब,

संस्कार शिक्षा फैले इस अवाम।।

 

गुरुवर बच्चों को दो ऐसा ज्ञान,

जिससे हो आम जन कल्याण।

वैर भाव घृणा भेदभाव मिटे,

मानवीय व्यवहार फैल सम भाण।।

 

गुरुवर बच्चों को दो ऐसा ज्ञान,

अमानवीयता पर लगे लगाम।

शांति नैतिकता फूले फरलें जग में,

ना हो नर यहां परेशान अवाम ।।

 

गुरुवर बच्चों को दो ऐसा ज्ञान,

इंसान बने वैज्ञानिक तर्क संग।

आदर्श बने इंसानियत का हर नर

पार पा ले ज़रा इस जीवन जंग।।

-मास्टर भूताराम जाखल

 

गुरुतर

Guru Purnima Poem In Hindi

 

मन है आज मेरा बहुत हर्षित पुलकित,

गुरु के चरणों में है पुष्प श्रद्धा के अर्पित।

शिक्षक दिवस है पर्व पावन सुनहरा,

गुरु-शिष्य का रिश्ता है सबसे गहरा।

 

आपसे ही महकता है यह सारा संसार,

गुरुवर आप ही हैं इस सृष्टि के आधार।

हे प्रिय ! गुरुवर आपके उपदेश और वचन,

करते हैं सारे जग और संसार को चमन

 

आपकी महत्ता का मैं क्या बखान करूँ?

आपके गौरव का कैसे मैं गुणगान करू?

माता-पिता से पहले आपका स्थान आता है,

आपके आगे ईश्वर भी नतमस्तक हो जाता है।

डरती है मेरी कलम आपके लिये लिखने में,

की कोई भूल न हो जाये शब्दों को गढ़ने में।

हे गुरुवर! नवनीत करता है बार -बार बंदन,

आपके चरण स्पर्श से मैं हो जाता हूँ सम चंदन।

-नवनीत कुमार शुक्ल

 

गुरु सबसे महान

Guru Purnima Poem In Hindi

 

माता -पिता ने हमको जन्म दिया,

गुरु ने ज्ञान सिखाया है,

उसी ज्ञान ने जीवन की मुश्किल राहो में

हमे चलना सिखाया है।

 

गुरु का स्थान सबसे ऊपर,

मिलाते हैं उस परमात्मा से

माता-पिता संस्कार सिखाते,

गुरु परम ज्ञान समझाते है।

सत्य जिनकी वाणी होती है,

उपकार उनका होता है धर्म,

 

अपने आत्म ज्ञान से सबका

मन हर ले ऐसा होते हैं वो गुरु परम।

हर साँस हर पल गुरु का है ऋणी,

गुरु नींव की भाति खड़ी कर देता है मिसाल नई,

 

ले शिक्षा शिष्य बढ़ जाते आगे,

गुरु का रहता हाल वही।

जलकर दिए कि तरह

जो बच्चों का जीवन रोशन कर जाते हैं,

सही मायनों में वही महान गुरु कहलाते हैं।

 

आसान नहीं महान गुरु बनजाना,

कुछ करके दिखाना पड़ता है,

इन्हीं मासूमों को सोने की तरह निखारकर,

अर्जून और एक्लवय बनाना पड़ता है।

 

शत् शत् नमन है उन गुरूओं को जिन्होंने

हमें मशाल की तरह जलना सिखाया है,

और हर मुश्किल में संभलना सिखाया है।

-डॉ. सुमन रानी अग्रवाल

 

मैं शिक्षक हूं

Guru Purnima Poem In Hindi

 

गर्व है सदा मुझे शिक्षक होने का

ज्ञानार्जन कर अध्यापन करने का

अंधकार से प्रकाश ओर ले जाने का

समाज में छात्रों का गुरु कहलाने का।।

 

समाज उत्थान ही मेरा लक्ष रहता

शिक्षा से देशहित में सहयोग देता

राष्टप्रेम, सद्धाव नई पीढ़ी जगाता

मानव मूल्यों का संस्कार कराता।।

 

जीवन के कई पल इम्तिहान में लगाता

शैक्षिक पात्रता पाकर शिक्षक हूं बनता

अपनी पीड़ा त्यागकर छात्र हित देखता

नित्य उनमें आगे बढ़ने की चाहत भरता।।

 

वर्तमान शिक्षा क्षेत्र में नए शोध हूं करता

छात्रों के बौद्िक स्तर में प्रगति हूं लाता

अंधविश्वासों प्रति पुरजोर विरोध दर्शाता

महामारी में भी समाज सुधार हूं करता ।।

 

नई शिक्षा नीति का अवलंब हूं करता

कोरोना काल में भी ऑनलाईन हूं पढ़ाता

सभी छात्रों को समान निगाह से देखता

नीच-ऊँच भेद तज सदगुरु मैं हूं बनता।।

-डॉ. पोपट भावराव बिरारी

 

गुरु का महत्व

Guru Purnima Poem In Hindi

 

तम मिटा फैलाए उजियारा, जो पोषित करे संस्कार।

जीवन सुखमय हो जाएगा, रहो गुरु के पास ।।

अंधकार अज्ञान मिटाए, जीवन पथ का बोध कराएं।

क्षण क्षण अपना देकर, शिष्य में सद्ण विकसाए।

 

गुरु ही शक्ति गुरु ही भक्ति,

गुरु से मिलती अंतर्दृष्टि।

गुरु की काशी, गुरु ही काबा,

गुरु ही जीवन राह दिखाएं।।

 

जीवन की दिशा दिखाएं.

ज्ञान की ज्योत जलाए।

सुख दुख में जीना कैसे ?

इसका भी सार बताएं।।

 

अन्तर में जो नेह बढ़ाएं,

सबसे जो सहकार सिखाएं।

समदर्शी हो चिंतन मन का,

बीज उसी के बोता जाए।।

 

संस्कृति, संस्कार सिखाएं,

ज्योति पावन ज्ञान जलाएं।

निज का ज्ञान सुसंचित सारा,

शिष्य को देता नित जाए।।

 

जीवन का मर्म सिखाकर,

जो दूर करें प्रतिकार।

जीवन सुखमय हो जाएगा,

रहो गुरु के पास।।

-स्मृति चौधरी

 

गुरु की महिमा

Guru Purnima Poem In Hindi

 

सौ सौ बार नमन हम करते,

अपने सारे गुरूओं को

सौ सौ बार हम शीश करते,

अपने प्यारे गुरुओं को.

 

गुरु हमें शिक्षा देकर के,

हम सबका ज्ञान बढ़ाते

आशीर्वाद अपना देकर के,

जीवन सबका सफल बनाते.

 

सौ सौ बार नमन हम करते,

अपने सारे गुरूओं को…..

कबीर दास ने गुरु का दजो,

सबसे बड़ा ही बताया है.

 

क्योंकि गुरू ने ही तो प्रभु जी

का ज्ञान हमको कराया है।

सौ सौ बार……….

 

शिक्षक दिवस आ रहा है,

गुरूओं का मन हर्षा रहा है

कई जगहों पर उत्कृष्ट शिक्षक

गुरु सम्मान दिया जा रहा है।

 

सौ सौ बार नमन हम करते,

अपने सारे गुरूओं को….

-माला सिंह

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